बाप-बेटे के रिश्तों को दिखाती है ‘रुख’

बाप-बेटे के रिश्तों को दिखाती है ‘रुख’

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मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘रुख’  कम बजट की फिल्म है और इसकी रिलीज भी मेकर्स ने सीमित रखी है क्योंकि उन्हें फिल्म का मिजाज पहले से ही पता है, अब देखना दिलचस्प होगा की जहां एक तरफ पहले से ही सीक्रेट सुपरस्टार और गोलमाल अगेन बॉक्स ऑफिस पर जगह बनाये हुए हैं, वहीँ इसी शुक्रवार  जिया और जिया फिल्म भी रिलीज की जा रही है, इस बीच रुख को कितनी स्क्रीन्स मिलती हैं, और वर्ड ऑफ़ माउथ सही रहा तो मेकर्स को फायदा जरूर होगा.

‘रुख’ मसाला फिल्म नहीं है शायद इसका स्वाद हर किसी को पसंद नही आये. फिल्म काफी धीमे धीमे चलती है यानी इसकी रफ़्तार काफी कमजोर है. फिल्म की कहानी तो सरल है लेकिन ट्रीटमेंट और भी सस्पेंस से भरा जाता तो शायद ज्यादा रोचक लगती, जो बॉलीवुड की टिपिकल मसाला और मार-धाड़ वाली फिल्मों से हटकर कुछ अलग देखना चाहते हैं तो ‘रुख’ फिल्म उनके लिए हैं.बेहतरीन एक्टिंग और शानदार कहानी के लिए ये फिल्म एक बार जरूर देखा जाना चाहिए.

‘रुख’ शब्द के बहुत मायने होते हैं, पहला इसको दिशा के नाम से भी जानते हैं और वहीं रुख का मतलब ‘एटीट्यूड’ और ‘चेहरा’ भी होता है. अतनु मुखर्जी के निर्देशन में बनने वाली ‘रूख’ पहली फिल्म है.

‘रूख’ की कहानी मुंबई के रहने वाले दिवाकर माथुर (मनोज बाजपेयी) और उसकी पत्नी नंदिनी (स्मिता ताम्बे) के आस-पास घुमती है. दिवाकर एक फैक्ट्री में रोबिन (कुमुद मिश्रा) के साथ पार्टनर है लेकिन एक दिन ऐसा आता है जब सड़क दुर्घटना में दिवाकर की मौत हो जाती है और इस बात का पता जब बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले दिवाकर के 18 साल के बेटे ध्रुव (आदर्श गौरव) को चलता है तो वो अपनी मां, दादा और नानी के पास रहने लगता है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब ध्रुव को पता चलता है कि उसके पिता की मौत के पीछे बहुत सारी बातें हैं, जिसका पता वो एक-एक करके निकालने की कोशिश करता है. ध्रुव का साथ उसके दोस्त और आस पास के लोग देते हैं.

मनोज बाजपेयी ने गजब का एक्टिंग किया है और उनकी फ्री फ्लो अदायगी बस देखने लायक है वहीं मां का किरदार अभिनेत्री स्मिता ताम्बे ने भी अच्छा काम किया. आदर्श गौरव ने बेटे के रूप में शानदार एक्टिंग किया जिसकी प्रशंसा की जाएगी. बाकी कुमुद मिश्रा के साथ साथ जयहिंद का काम भी बहुत उम्दा है. कास्टिंग के हिसाब से फिल्म सटीक है.फिल्म के  दोनों गाने ‘है बाकी’ और ‘खिड़की’ अच्छे हैं और स्क्रीनप्ले के साथ चलते हैं. बैकग्राउंड स्कोर भी अच्छा है. कनेक्ट करना आसान हो जाता है.

स्टार:5/3

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